महाभारत 1.124.17
ततः शुक्लाम्बरधरः शुक्लयज्ञोपवीतवान्शुक्लकेशः सितश्मश्रुः शुक्लमाल्यानुलेपनः
tataḥ śuklāmbaradharaḥ śuklayajñopavītavānśuklakeśaḥ sitaśmaśruḥ śuklamālyānulepanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें