महाभारत 1.124.25
तत्कुमारबलं तत्र गृहीतशरकार्मुकम्गन्धर्वनगराकारं प्रेक्ष्य ते विस्मिताभवन्
tatkumārabalaṃ tatra gṛhītaśarakārmukamgandharvanagarākāraṃ prekṣya te vismitābhavan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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