महाभारत 1.124.31
बद्धकक्ष्यौ महाबाहू पौरुषे पर्यवस्थितौबृंहन्तौ वाशिताहेतोः समदाविव कुञ्जरौ
baddhakakṣyau mahābāhū pauruṣe paryavasthitaubṛṃhantau vāśitāhetoḥ samadāviva kuñjarau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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