महाभारत 1.124.33
विदुरो धृतराष्ट्राय गान्धार्यै पाण्डवारणिःन्यवेदयेतां तत्सर्वं कुमाराणां विचेष्टितम्
viduro dhṛtarāṣṭrāya gāndhāryai pāṇḍavāraṇiḥnyavedayetāṃ tatsarvaṃ kumārāṇāṃ viceṣṭitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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