महाभारत 1.124.6
स्पृहयाम्यद्य निर्वेदात्पुरुषाणां सचक्षुषाम्अस्त्रहेतोः पराक्रान्तान्ये मे द्रक्ष्यन्ति पुत्रकान्
spṛhayāmyadya nirvedātpuruṣāṇāṃ sacakṣuṣāmastrahetoḥ parākrāntānye me drakṣyanti putrakān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें