महाभारत 1.126.3
कन्यागर्भः पृथुयशाः पृथायाः पृथुलोचनःतीक्ष्णांशोर्भास्करस्यांशः कर्णोऽरिगणसूदनः
kanyāgarbhaḥ pṛthuyaśāḥ pṛthāyāḥ pṛthulocanaḥtīkṣṇāṃśorbhāskarasyāṃśaḥ karṇo'rigaṇasūdanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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