महाभारत 1.126.4
सिंहर्षभगजेन्द्राणां तुल्यवीर्यपराक्रमःदीप्तिकान्तिद्युतिगुणैः सूर्येन्दुज्वलनोपमः
siṃharṣabhagajendrāṇāṃ tulyavīryaparākramaḥdīptikāntidyutiguṇaiḥ sūryendujvalanopamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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