महाभारत 1.126.8
सोऽब्रवीन्मेघधीरेण स्वरेण वदतां वरःभ्राता भ्रातरमज्ञातं सावित्रः पाकशासनिम्
so'bravīnmeghadhīreṇa svareṇa vadatāṃ varaḥbhrātā bhrātaramajñātaṃ sāvitraḥ pākaśāsanim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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