महाभारत 1.127.2
तमालोक्य धनुस्त्यक्त्वा पितृगौरवयन्त्रितःकर्णोऽभिषेकार्द्रशिराः शिरसा समवन्दत
tamālokya dhanustyaktvā pitṛgauravayantritaḥkarṇo'bhiṣekārdraśirāḥ śirasā samavandata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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