महाभारत 1.164.2उवाच च महेष्वासो गन्धर्वं कुरुसत्तमःजातकौतूहलोऽतीव वसिष्ठस्य तपोबलात्uvāca ca maheṣvāso gandharvaṃ kurusattamaḥjātakautūhalo'tīva vasiṣṭhasya tapobalātइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें