महाभारत 1.174.7
तान्धौम्यः प्रतिजग्राह सर्ववेदविदां वरःपाद्येन फलमूलेन पौरोहित्येन चैव ह
tāndhaumyaḥ pratijagrāha sarvavedavidāṃ varaḥpādyena phalamūlena paurohityena caiva ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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