महाभारत 1.175.2
ते प्रयाता नरव्याघ्रा मात्रा सह परंतपाःब्राह्मणान्ददृशुर्मार्गे गच्छतः सगणान्बहून्
te prayātā naravyāghrā mātrā saha paraṃtapāḥbrāhmaṇāndadṛśurmārge gacchataḥ sagaṇānbahūn
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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