महाभारत 1.191.5
यथेन्द्राणी हरिहये स्वाहा चैव विभावसौरोहिणी च यथा सोमे दमयन्ती यथा नले
yathendrāṇī harihaye svāhā caiva vibhāvasaurohiṇī ca yathā some damayantī yathā nale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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