महाभारत 1.198.4
क्षत्तरानय गच्छैतान्सह मात्रा सुसत्कृतान्तया च देवरूपिण्या कृष्णया सह भारत
kṣattarānaya gacchaitānsaha mātrā susatkṛtāntayā ca devarūpiṇyā kṛṣṇayā saha bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें