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महाभारत 1.2.104
श्लोकानां द्वे सहस्रे तु पञ्च श्लोकशतानि चश्लोकाश्चैकादश ज्ञेयाः पर्वण्यस्मिन्प्रकीर्तिताः
ślokānāṃ dve sahasre tu pañca ślokaśatāni caślokāścaikādaśa jñeyāḥ parvaṇyasminprakīrtitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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