महाभारत 1.2.105
अतः परं तृतीयं तु ज्ञेयमारण्यकं महत्पौरानुगमनं चैव धर्मपुत्रस्य धीमतः
ataḥ paraṃ tṛtīyaṃ tu jñeyamāraṇyakaṃ mahatpaurānugamanaṃ caiva dharmaputrasya dhīmataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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