महाभारत 1.2.10
तस्मिन्परमधर्मिष्ठे देशे भूदोषवर्जितेअष्टादश समाजग्मुरक्षौहिण्यो युयुत्सया
tasminparamadharmiṣṭhe deśe bhūdoṣavarjiteaṣṭādaśa samājagmurakṣauhiṇyo yuyutsayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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