महाभारत 1.2.110
वनवासगतानां च पाण्डवानां महात्मनाम्स्वर्गे प्रवृत्तिराख्याता लोमशेनार्जुनस्य वै
vanavāsagatānāṃ ca pāṇḍavānāṃ mahātmanāmsvarge pravṛttirākhyātā lomaśenārjunasya vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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