महाभारत 1.2.14
अक्षौहिण्याः परीमाणं रथाश्वनरदन्तिनाम्यथावच्चैव नो ब्रूहि सर्वं हि विदितं तव
akṣauhiṇyāḥ parīmāṇaṃ rathāśvanaradantināmyathāvaccaiva no brūhi sarvaṃ hi viditaṃ tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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