महाभारत 1.2.156
कश्मलं यत्र पार्थस्य वासुदेवो महामतिःमोहजं नाशयामास हेतुभिर्मोक्षदर्शनैः
kaśmalaṃ yatra pārthasya vāsudevo mahāmatiḥmohajaṃ nāśayāmāsa hetubhirmokṣadarśanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें