महाभारत 1.2.160
द्रोणपर्व ततश्चित्रं बहुवृत्तान्तमुच्यतेयत्र संशप्तकाः पार्थमपनिन्यू रणाजिरात्
droṇaparva tataścitraṃ bahuvṛttāntamucyateyatra saṃśaptakāḥ pārthamapaninyū raṇājirāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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