महाभारत 1.2.167
अध्यायानां शतं प्रोक्तमध्यायाः सप्ततिस्तथाअष्टौ श्लोकसहस्राणि तथा नव शतानि च
adhyāyānāṃ śataṃ proktamadhyāyāḥ saptatistathāaṣṭau ślokasahasrāṇi tathā nava śatāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें