महाभारत 1.2.168
श्लोका नव तथैवात्र संख्यातास्तत्त्वदर्शिनापाराशर्येण मुनिना संचिन्त्य द्रोणपर्वणि
ślokā nava tathaivātra saṃkhyātāstattvadarśināpārāśaryeṇa muninā saṃcintya droṇaparvaṇi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें