महाभारत 1.2.178
अतः परं प्रवक्ष्यामि सौप्तिकं पर्व दारुणम्भग्नोरुं यत्र राजानं दुर्योधनममर्षणम्
ataḥ paraṃ pravakṣyāmi sauptikaṃ parva dāruṇambhagnoruṃ yatra rājānaṃ duryodhanamamarṣaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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