महाभारत 1.2.18
चमूस्तु पृतनास्तिस्रस्तिस्रश्चम्वस्त्वनीकिनीअनीकिनीं दशगुणां प्राहुरक्षौहिणीं बुधाः
camūstu pṛtanāstisrastisraścamvastvanīkinīanīkinīṃ daśaguṇāṃ prāhurakṣauhiṇīṃ budhāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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