महाभारत 1.2.20
शतान्युपरि चैवाष्टौ तथा भूयश्च सप्ततिःगजानां तु परीमाणमेतदेवात्र निर्दिशेत्
śatānyupari caivāṣṭau tathā bhūyaśca saptatiḥgajānāṃ tu parīmāṇametadevātra nirdiśet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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