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महाभारत 1.2.213
यं दृष्ट्वा प्रस्थितं साध्वी पृथाप्यनुययौ तदापुत्रराज्यं परित्यज्य गुरुशुश्रूषणे रता
yaṃ dṛṣṭvā prasthitaṃ sādhvī pṛthāpyanuyayau tadāputrarājyaṃ parityajya guruśuśrūṣaṇe ratā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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