महाभारत 1.2.2
सूत उवाच · sūta uvāca
शुश्रूषा यदि वो विप्रा ब्रुवतश्च कथाः शुभाःसमन्तपञ्चकाख्यं च श्रोतुमर्हथ सत्तमाः
śuśrūṣā yadi vo viprā bruvataśca kathāḥ śubhāḥsamantapañcakākhyaṃ ca śrotumarhatha sattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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