महाभारत 1.2.32
इतिहासोत्तमे ह्यस्मिन्नर्पिता बुद्धिरुत्तमास्वरव्यञ्जनयोः कृत्स्ना लोकवेदाश्रयेव वाक्
itihāsottame hyasminnarpitā buddhiruttamāsvaravyañjanayoḥ kṛtsnā lokavedāśrayeva vāk
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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