महाभारत 1.2.3
त्रेताद्वापरयोः संधौ रामः शस्त्रभृतां वरःअसकृत्पार्थिवं क्षत्रं जघानामर्षचोदितः
tretādvāparayoḥ saṃdhau rāmaḥ śastrabhṛtāṃ varaḥasakṛtpārthivaṃ kṣatraṃ jaghānāmarṣacoditaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें