महाभारत 1.2.4
स सर्वं क्षत्रमुत्साद्य स्ववीर्येणानलद्युतिःसमन्तपञ्चके पञ्च चकार रुधिरह्रदान्
sa sarvaṃ kṣatramutsādya svavīryeṇānaladyutiḥsamantapañcake pañca cakāra rudhirahradān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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