महाभारत 1.2.61
ऐषीकं पर्व निर्दिष्टमत ऊर्ध्वं सुदारुणम्जलप्रदानिकं पर्व स्त्रीपर्व च ततः परम्
aiṣīkaṃ parva nirdiṣṭamata ūrdhvaṃ sudāruṇamjalapradānikaṃ parva strīparva ca tataḥ param
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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