महाभारत 1.2.73
आस्तीके सर्वनागानां गरुडस्य च संभवःक्षीरोदमथनं चैव जन्मोच्छैःश्रवसस्तथा
āstīke sarvanāgānāṃ garuḍasya ca saṃbhavaḥkṣīrodamathanaṃ caiva janmocchaiḥśravasastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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