महाभारत 1.2.78
वसूनां पुनरुत्पत्तिर्भागीरथ्यां महात्मनाम्शंतनोर्वेश्मनि पुनस्तेषां चारोहणं दिवि
vasūnāṃ punarutpattirbhāgīrathyāṃ mahātmanāmśaṃtanorveśmani punasteṣāṃ cārohaṇaṃ divi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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