महाभारत 1.2.91
पार्थस्य वनवासश्च उलूप्या पथि संगमःपुण्यतीर्थानुसंयानं बभ्रुवाहनजन्म च
pārthasya vanavāsaśca ulūpyā pathi saṃgamaḥpuṇyatīrthānusaṃyānaṃ babhruvāhanajanma ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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