महाभारत 1.2.93
हरणं गृह्य संप्राप्ते कृष्णे देवकिनन्दनेसंप्राप्तिश्चक्रधनुषोः खाण्डवस्य च दाहनम्
haraṇaṃ gṛhya saṃprāpte kṛṣṇe devakinandanesaṃprāptiścakradhanuṣoḥ khāṇḍavasya ca dāhanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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