महाभारत 1.200.20
रक्ष्यतां सौहृदं तस्मादन्योन्यप्रतिभाविकम्यथा वो नात्र भेदः स्यात्तत्कुरुष्व युधिष्ठिर
rakṣyatāṃ sauhṛdaṃ tasmādanyonyapratibhāvikamyathā vo nātra bhedaḥ syāttatkuruṣva yudhiṣṭhira
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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