महाभारत 1.211.12
एते परिवृताः स्त्रीभिर्गन्धर्वैश्च पृथक्पृथक्तमुत्सवं रैवतके शोभयां चक्रिरे तदा
ete parivṛtāḥ strībhirgandharvaiśca pṛthakpṛthaktamutsavaṃ raivatake śobhayāṃ cakrire tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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