महाभारत 1.34.17
सोऽहमेवं प्रपश्यामि वासुके भगिनीं तवजरत्कारुरिति ख्यातां तां तस्मै प्रतिपादय
so'hamevaṃ prapaśyāmi vāsuke bhaginīṃ tavajaratkāruriti khyātāṃ tāṃ tasmai pratipādaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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