महाभारत 1.52.8उच्छिखः सुरसो द्रङ्गो बलहेडो विरोहणःशिलीशलकरो मूकः सुकुमारः प्रवेपनःucchikhaḥ suraso draṅgo balaheḍo virohaṇaḥśilīśalakaro mūkaḥ sukumāraḥ pravepanaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें