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महाभारत 1.6.1
सूत उवाच · sūta uvāca
अग्नेरथ वचः श्रुत्वा तद्रक्षः प्रजहार ताम्ब्रह्मन्वराहरूपेण मनोमारुतरंहसा
agneratha vacaḥ śrutvā tadrakṣaḥ prajahāra tāmbrahmanvarāharūpeṇa manomārutaraṃhasā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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