महाभारत 1.6.2
ततः स गर्भो निवसन्कुक्षौ भृगुकुलोद्वहरोषान्मातुश्च्युतः कुक्षेश्च्यवनस्तेन सोऽभवत्
tataḥ sa garbho nivasankukṣau bhṛgukulodvaharoṣānmātuścyutaḥ kukṣeścyavanastena so'bhavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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