महाभारत 1.60.21
सोमस्य तु सुतो वर्चा वर्चस्वी येन जायतेमनोहरायाः शिशिरः प्राणोऽथ रमणस्तथा
somasya tu suto varcā varcasvī yena jāyatemanoharāyāḥ śiśiraḥ prāṇo'tha ramaṇastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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