महाभारत 1.60.36
त्रयस्त्रिंशत इत्येते देवास्तेषामहं तवअन्वयं संप्रवक्ष्यामि पक्षैश्च कुलतो गणान्
trayastriṃśata ityete devāsteṣāmahaṃ tavaanvayaṃ saṃpravakṣyāmi pakṣaiśca kulato gaṇān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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