महाभारत 1.60.59
मातङ्गीमथ शार्दूलीं श्वेतां सुरभिमेव चसर्वलक्षणसंपन्नां सुरसां च यशस्विनीम्
mātaṅgīmatha śārdūlīṃ śvetāṃ surabhimeva casarvalakṣaṇasaṃpannāṃ surasāṃ ca yaśasvinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें