Loading
महाभारत 1.60.63
प्रजज्ञे त्वथ शार्दूली सिंहान्व्याघ्रांश्च भारतद्वीपिनश्च महाभाग सर्वानेव न संशयः
prajajñe tvatha śārdūlī siṃhānvyāghrāṃśca bhāratadvīpinaśca mahābhāga sarvāneva na saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें