महाभारत 1.78.18
मदधीना सती कस्मादकार्षीर्विप्रियं ममतमेवासुरधर्मं त्वमास्थिता न बिभेषि किम्
madadhīnā satī kasmādakārṣīrvipriyaṃ mamatamevāsuradharmaṃ tvamāsthitā na bibheṣi kim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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