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महाभारत 1.78.28
त्रयोऽस्यां जनिताः पुत्रा राज्ञानेन ययातिनादुर्भगाया मम द्वौ तु पुत्रौ तात ब्रवीमि ते
trayo'syāṃ janitāḥ putrā rājñānena yayātinādurbhagāyā mama dvau tu putrau tāta bravīmi te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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