महाभारत 1.78.32
ऋतुं वै याचमानाया न ददाति पुमान्वृतःभ्रूणहेत्युच्यते ब्रह्मन्स इह ब्रह्मवादिभिः
ṛtuṃ vai yācamānāyā na dadāti pumānvṛtaḥbhrūṇahetyucyate brahmansa iha brahmavādibhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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