महाभारत 1.78.5
देवयान्युवाचशोभनं भीरु सत्यं चेदथ स ज्ञायते द्विजःगोत्रनामाभिजनतो वेत्तुमिच्छामि तं द्विजम्
devayānyuvācaśobhanaṃ bhīru satyaṃ cedatha sa jñāyate dvijaḥgotranāmābhijanato vettumicchāmi taṃ dvijam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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